हाईलाइट्स
“इस शब्द का उच्चारण नहीं करती”
रुबीना इकबाल खान ने कहा कि वे जनगणमन और अन्य देशभक्ति गीत गाती हैं, लेकिन “वंदे मातरम्” के एक शब्द का उच्चारण नहीं करतीं। उनके मुताबिक, यह उनकी धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है और इसे लेकर उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाया जाता है।
आज़ादी के नारों पर भी टिप्पणी
उन्होंने आज़ादी के समय “वंदे मातरम्” के नारे लगाने वालों को लेकर कहा कि संभव है उन्होंने धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन न किया हो, जबकि उन्होंने किया है। इस बयान को लेकर विवाद और गहराने की संभावना है।
मिट्टी पर हक को लेकर बयान
रुबीना ने कहा कि इस देश की मिट्टी पर उनका अधिकार किसी से कम नहीं है। उन्होंने दफनाने और अंतिम संस्कार की परंपराओं का जिक्र करते हुए अपनी बात रखी, जिसे लेकर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
कांग्रेस से नाराजगी
कांग्रेस को लेकर उन्होंने नाराजगी जताई और कहा कि पार्टी उनका साथ नहीं देती। उन्होंने दावा किया कि वे निर्दलीय चुनाव जीतती हैं और उन्हें कांग्रेस से कोई फर्क नहीं पड़ता।
धार्मिक आधार पर दिया तर्क
अपने रुख को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस्लाम का पालन करती हैं, जिसमें केवल अल्लाह की इबादत की जाती है। उनके अनुसार “वंदे” का अर्थ इबादत और “मातरम्” का अर्थ धरती होता है, इसलिए वे इसे धार्मिक रूप से उचित नहीं मानतीं।
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