हाइलाइट्स
- सुप्रीम कोर्ट ने CBI और MP सरकार से व्यापमं घोटाले की 320 पेज शिकायत पर कार्रवाई पूछी
- अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को तय
- हाईकोर्ट ने पहले याचिका खारिज की थी
- 2014 से लेकर 2023 तक मामला लंबित, फाइलों में दर्ज शिकायतें
Vyapam Scam 2026 : भोपाल। व्यापमं महाघोटाले की जांच में एक बार फिर नया मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए CBI और मध्य प्रदेश सरकार से स्पष्ट आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने सवाल किया कि सकलेचा द्वारा सौंपे गए 320 पन्नों की डिटेल शिकायत पर अब तक क्या एक्शन लिया गया। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने निर्देश दिए कि जांच एजेंसी और राज्य शासन पूरी जांच और दाखिल चार्जशीट का शपथ पत्र (एफिडेविट) के साथ पेश करें।
अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को तय की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
- 2014: STF के विज्ञापन के बाद पारस सकलेचा ने पुख्ता दस्तावेजों के साथ पहली शिकायत की।
- 2015: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच CBI को मिली। सकलेचा ने दिल्ली में 320 पन्नों के दस्तावेज सौंपे।
- 2016: CBI और STF ने बयान दर्ज किए, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई और फाइलें विभाग दर विभाग घूमती रहीं।
- 2023: कार्रवाई न होने पर सकलेचा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इंदौर हाईकोर्ट ने अप्रैल 2024 में सकलेचा की याचिका खारिज कर दी थी, यह कहते हुए कि वे इस मामले में सीधे तौर पर ‘प्रभावित पक्ष’ नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए जवाब तलब किया है।
- सकलेचा की ओर: सीनियर एडवोकेट विवेक तन्खा, सर्वम रितम खरे, विपुल तिवारी, इंद्रदेव सिंह।
- शासन की ओर: अतिरिक्त एडवोकेट जनरल श्रीधर पोटराजू।
- CBI की ओर: दविंदर पाल सिंह।