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Gangaur festival Harda : हरदा में गणगौर महोत्सव में परिवार की 15 साल पुरानी परंपरा बनी पहचान, भजन-नृत्य से बांधा समा

Gangaur festival Harda

हाइलाइट्स

  • 15 साल से परिवार निभा रहा गणगौर की अनोखी परंपरा।

  • भजन, संगीत और नृत्य में हर सदस्य की भागीदारी।

  • 9 दिन घर छोड़कर महोत्सव में रहते हैं शामिल।

  • संयुक्त परिवार का संदेश दे रहा यह अनोखा प्रयास।

Gangaur festival Harda : हरदा।  चैत्र मास के पहले सावे पर जिले में गणगौर महोत्सव पूरे उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। शहर से लेकर गांवों तक भक्ति और संस्कृति की झलक देखने को मिल रही है।

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इसी बीच ग्राम कमताड़ा का एक परिवार अपनी अनोखी परंपरा के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पिछले 15 वर्षों से यह परिवार गणगौर महोत्सव में भजन और नृत्य की प्रस्तुति देकर अलग पहचान बना चुका है।

15 साल से निभा रहे परंपरा, पूरा परिवार रहता है शामिल

परिवार के मुखिया कैलाश सेन बताते हैं कि वे पिछले 15 सालों से लगातार गणगौर महोत्सव में प्रस्तुति दे रहे हैं। खास बात यह है कि इस मंडल में परिवार का हर सदस्य हिस्सा लेता है—चाहे बच्चे हों, महिलाएं हों या बुजुर्ग।

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भजन और संगीत में हर सदस्य की अलग भूमिका

परिवार में कोई पियानो बजाता है, तो कोई ढोलक। बहुएं पारंपरिक भजन गाती हैं, वहीं बच्चे भी पीछे नहीं रहते। नन्हीं बालिकाएं भजनों पर सुंदर नृत्य प्रस्तुत करती हैं, जिससे माहौल भक्तिमय हो जाता है।

संयुक्त परिवार की मिसाल, समाज को दे रहे संदेश

यह परिवार सिर्फ प्रस्तुति ही नहीं देता, बल्कि समाज को एकजुट रहने का संदेश भी देता है। परिवार का मानना है कि आज के समय में जहां लोग अलग-अलग रहना पसंद कर रहे हैं, वहीं संयुक्त परिवार की अपनी अलग खुशी और ताकत होती है।

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पूरे नौ दिन घर छोड़, भक्ति में रहते लीन

परिवार के सदस्य बताते हैं कि वे पूरे नौ दिनों तक अपने घर पर ताला लगाकर गणगौर महोत्सव में जुटे रहते हैं। उनका उद्देश्य इस परंपरा को जिंदा रखना और आने वाली पीढ़ी को इससे जोड़ना है।

युवाओं को जोड़ने की पहल

परिवार का प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा युवा इस परंपरा से जुड़ें और गणगौर महोत्सव के महत्व को समझें। उनका मानना है कि यही हमारी संस्कृति को आगे बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है।

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