हाइलाइट्स
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मालवा, महाकौशल और मध्यभारत प्रांत खत्म, 6 नए संभाग बनाए गए।
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पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी एक प्रचारक और कार्यकारिणी संभालेगी।
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संघ में युवाओं को अधिक जिम्मेदारी, “युवा संघर्ष और संघर्ष का युवा वर्ष” अभियान।
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वर्ष 2026 में संघ की 55683 जगहों पर 88949 शाखाएं सक्रिय।
RSS sambhag system : मध्यप्रदेश। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मध्यप्रदेश में अपने संगठन ढांचे में बड़े बदलाव करने जा रहा है। संगठन ने मालवा, महाकौशल और मध्यभारत प्रांत को समाप्त कर दिया है और प्रदेश में अब 6 संभाग बनाए जाएंगे।
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यह कदम संघ के “युवा संघर्ष और संघर्ष का युवा वर्ष” अभियान के तहत लिया गया है, ताकि युवाओं को संगठन में अधिक जिम्मेदारी दी जा सके और संगठन का विस्तार तेजी से किया जा सके।
मध्यप्रदेश में संघ की नई संभागीय व्यवस्था
संघ के प्रांत संघचालक अशोक पांडे ने बताया कि पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी अब एक प्रचारक संभालेंगे। प्रचारक के साथ एक कार्यकारिणी भी नई व्यवस्था के तहत कार्य करेगी। संभाग स्तर पर अलग-अलग प्रचारक नियुक्त किए जाएंगे। इस बदलाव के बाद मालवा प्रांत इंदौर और उज्जैन संभाग में विभाजित होगा।
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प्रांतीय स्तर की संरचना समाप्त हो जाने के बाद अब प्रदेश कार्यसमिति की संरचना में केवल एक प्रदेश प्रचारक और एक कार्यवाहक रहेंगे। इस कदम से संगठन की भौगोलिक संरचना में भी बदलाव आएगा और संघ की गतिविधियों को गांव-गांव और घर-घर तक पहुँचाने में आसानी होगी।
संगठन विस्तार और शाखाओं की संख्या
RSS मध्यभारत प्रांत में वर्तमान में 2481 स्थानों पर 3842 शाखाएं संचालित हो रही हैं। संघ ने बताया कि हिंदू सम्मेलनों में अब तक 52 लाख से अधिक लोग शामिल हो चुके हैं। संगठन के 80 हजार स्वयंसेवकों ने करीब 27 लाख से अधिक परिवारों से संपर्क किया है।
देश स्तर पर भी संघ ने संगठनात्मक वृद्धि दर्ज की है। साल 2025 में संघ के पास 51740 स्थानों पर 83129 शाखाएं थीं, जबकि साल 2026 में यह संख्या बढ़कर 55683 स्थानों पर 88949 शाखाएं हो गई। एक साल में 3943 नए स्थान और 5820 नई शाखाएं जुड़ी हैं।
सामाजिक और युवाओं पर जोर
संघ का कहना है कि संगठन विस्तार के साथ-साथ सामाजिक समरसता, पर्यावरण चेतना, कुटुंभ प्रबोधन, स्वयं का बोध और नागरिक कर्तव्यों के पालन के लिए भी काम कर रहा है। संगठन ने युवाओं को “युवा संघर्ष और संघर्ष का युवा वर्ष” के तहत अधिक सक्रिय भूमिका देने की योजना बनाई है।
RSS के अनुसार, केरल में अब तक 55 हजार से अधिक मुस्लिम और 54 हजार से अधिक ईसाई परिवारों से संपर्क किया गया है। संगठन का लक्ष्य है कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को हर क्षेत्र में फैलाया जाए।
बदलाव का समय और संभागीय विस्तार
प्रांत संघ की व्यवस्था अब समाप्त हो रही है और मार्च 2027 से संभागीय व्यवस्था लागू हो जाएगी। मध्यप्रदेश में अब कुल 7 संभाग होंगे और पूरे मध्यभारत में 9 संभाग। संभाग स्तर पर कार्यकारिणी बनाए जाने से संगठन की गतिविधियों का संचालन और निगरानी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।
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नए संगठनात्मक बदलाव से युवाओं को मिलेगा लाभ
नए ढांचे में युवाओं को अधिक जिम्मेदारी दी जाएगी और संगठन की कार्यशैली को और अधिक सक्रिय बनाने पर जोर दिया गया है। संघ का मानना है कि घर-घर जाकर शाखाओं तक पहुँचने और सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने में यह बदलाव महत्वपूर्ण साबित होगा।