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Fake Death Certificate : जिंदा युवक का बना दिया मृत्यु प्रमाणपत्र, 7 महीने बाद भी नहीं हुई FIR

Fake Death Certificate

हाइलाइट्स

  • लोन और बीमा क्लेम के लिए बनाया फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र

  • जिंदा युवक को मृत बताने का मामला उजागर

  • 7 महीने बाद भी दर्ज नहीं हुई FIR

  • पंचायत और पुलिस के बीच उलझी कार्रवाई

Fake Death Certificate : नर्मदापुरम। जिले के बनखेड़ी क्षेत्र की ग्राम पंचायत उमरधा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां लोन और बीमा क्लेम लेने के लिए एक जीवित युवक का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा दिया गया।

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हैरानी की बात यह है कि मामला सामने आने के करीब 7 महीने बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई है और फाइल पंचायत व पुलिस के बीच उलझी हुई है।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक लापरवाही के कारण कार्रवाई में लगातार देरी हो रही है। जिस पंचायत से यह प्रमाणपत्र जारी हुआ, वहां की सरपंच जागृति जूदेव हैं, जिन्हें प्रदेश की सबसे कम उम्र की सरपंचों में गिना जाता है।

लोन और बीमा से बचने के लिए रची साजिश

जानकारी के मुताबिक उमरधा गांव निवासी नर्मदा कुशवाह ट्रैक्टर ड्राइवर था। करीब ढाई साल पहले वह ट्रैक्टर हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया था। दुर्घटना में उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई, जिसके बाद से वह बिस्तर पर है।

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नर्मदा ने जीवन बीमा पॉलिसी ली हुई थी और ट्रैक्टर खरीदने के लिए फाइनेंस कंपनी से लोन भी लिया था। हादसे के बाद जब किस्तें भरना मुश्किल होने लगा, तो कथित तौर पर एक एजेंट के कहने पर परिवार ने फर्जी मौत दिखाने की साजिश रच डाली।

Narmadapuram Fake Death Certificate Case: FIR Delayed, Officials Hesitate

आवेदन के दो दिन बाद जारी हो गया मृत्यु प्रमाणपत्र

बताया जा रहा है कि नर्मदा के पिता और चाचा ने 27 मार्च 2025 को उसकी सामान्य मौत बताते हुए अंतिम संस्कार की जानकारी दी। इसके बाद 10 अप्रैल 2025 को मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया गया और तत्कालीन पंचायत सचिव के सत्यापन के आधार पर 12 अप्रैल को प्रमाणपत्र जारी भी हो गया।

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इसका उद्देश्य बीमा कंपनी से क्लेम लेना और फाइनेंस कंपनी को मृत्यु की सूचना देकर लोन चुकाने से बचना था।

जांच में सामने आई सच्चाई

मामला सामने आने के बाद जनपद पंचायत बनखेड़ी की जांच टीम ने प्राथमिक जांच में पिता और चाचा को दोषी पाया। इसके बाद फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया गया।

जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन ने संबंधित अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए थे।

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कार्रवाई में देरी, जिम्मेदारी तय नहीं

जांच के बावजूद अब तक पुलिस में मामला दर्ज नहीं हो पाया है। जनपद पंचायत का कहना है कि एफआईआर के लिए दस्तावेज थाने भेजे गए थे, लेकिन पुलिस ने कुछ कमियां बताकर फाइल वापस कर दी।

वहीं पुलिस का कहना है कि जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार कौन है, इसलिए आवश्यक दस्तावेज मांगे गए हैं।

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