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Bhopal Mahanagar Nigam Fraud : भोपाल नगर निगम में करोड़ों के फर्जी बिल घोटाले में FIR, लोकायुक्त ने मारे छापे

Bhopal Mahanagar Nigam Fraud

हाइलाइट्स

  • भोपाल नगर निगम के अपर आयुक्त पर FIR दर्ज
  • लोकायुक्त ने करोड़ों के फर्जी बिलों का खुलासा किया
  • लगभग 10 साल का डिजिटल और फिजिकल डाटा जब्त
  • SAP सॉफ्टवेयर डेटा और दस्तावेजों की जांच जारी

Bhopal Mahanagar Nigam Fraud : भोपाल।  भोपाल नगर निगम में बिना काम किए फर्जी बिल तैयार कर करोड़ों रुपए निकालने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। टीम ने निगम के डेटा सेंटर और प्रमुख शाखाओं में छापेमारी कर पिछले लगभग 10 साल का डिजिटल और फिजिकल डाटा जब्त किया।

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शिकायत और FIR दर्ज

निगम में फर्जी भुगतान की शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को मिली थी। प्रारंभिक जांच में तथ्य सही पाए जाने पर 9 मार्च को अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और धोखाधड़ी की धाराओं में FIR दर्ज की गई। इसके बाद कोर्ट से सर्च वारंट लेकर छापेमारी की गई।

सॉफ्टवेयर से तैयार किए गए फर्जी बिल

लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के अनुसार, आरोप है कि सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बिल बनाए गए। बिना किसी वास्तविक काम के निगम के परिचितों और रिश्तेदारों की फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान किया गया।

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किस तरह हुई गड़बड़ी

  • नगर निगम के जलकार्य, सामान्य प्रशासन और केंद्रीय वर्कशॉप विभाग के नाम पर फर्जी काम दिखाए गए।

  • कई मामलों में वास्तविक काम हुआ ही नहीं, लेकिन ई-बिल सिस्टम में तैयार कर दिए गए।

  • कुछ विभागों को बिल के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

तीन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी

लोकायुक्त टीम ने सुबह 10:30 बजे निगम के लेखा शाखा, कंप्यूटर शाखा, डेटा सेंटर, लिंक रोड-2 मुख्यालय और फतेहगढ़ पुराने कार्यालय में एक साथ छापेमारी की।

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SAP सॉफ्टवेयर डेटा जब्त

प्रारंभिक जांच में मोटर वर्क शाखा, जलकार्य और सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े कई कामों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। टीम ने SAP सॉफ्टवेयर का डिजिटल डाटा जब्त किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन-किन कामों के नाम पर भुगतान हुआ और वास्तविक काम हुआ या नहीं।

अपर आयुक्त का बयान

अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर ने कहा कि बिल सीधे लेखा शाखा में तैयार या पास नहीं किए जाते। सभी बिल संबंधित विभाग से सत्यापन और फंड की उपलब्धता के बाद नगर निगम आयुक्त से चर्चा के बाद भुगतान किए जाते हैं।

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