हाइलाइट्स
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विदिशा में पंचकल्याणक महामहोत्सव का शुभारंभ
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हाथी-घोड़े और झांकियों के साथ निकली शोभायात्रा
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पांच चांदी की पालकियों और 14 बग्गियों में विराजमान रहे श्रीजी
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हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी, जैन महाविद्यालय में भव्य आयोजन
Vidisha News : विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा में छह दिवसीय पंचकल्याणक महामहोत्सव का शुभारंभ भव्य धार्मिक कार्यक्रमों के साथ हुआ। महोत्सव के पहले दिन घटयात्रा और श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें जैन समाज के हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
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शोभायात्रा माधवगंज स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर से प्रारंभ हुई और शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए निकाली गई।
संतों के सानिध्य में हो रहा आयोजन
पंचकल्याणक महामहोत्सव और देश शांति विधान का आयोजन जैन संतों के सानिध्य में किया जा रहा है। कार्यक्रम में मुनि श्री संभवसागर महाराज, मुनि श्री निस्सीमसागर महाराज और मुनि श्री संस्कारसागर महाराज ससंघ मार्गदर्शन दे रहे हैं।
वहीं कार्यक्रम का संचालन प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी विनय भैया सम्राट और तरुण भैया (इंदौर) के निर्देशन में किया जा रहा है।
हाथी-घोड़े और झांकियां बनीं आकर्षण का केंद्र
शोभायात्रा में हाथी, घोड़े, बैंड दल और कई आकर्षक धार्मिक झांकियां शामिल थीं। हाथी पर सोधर्म इंद्र के रूप में सक्षम जैन अपने परिवार के साथ धर्मध्वजा लेकर सवार थे, जबकि घोड़े पर ध्वजवाहक आगे चल रहे थे। यात्रा में आचार्य विद्यासागर महाराज और आचार्य समयसागर महाराज के बड़े कटआउट भी आकर्षण का केंद्र बने रहे।
शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं एक जैसी साड़ी पहनकर सिर पर कलश रखकर शामिल हुईं। विद्यासागर दिव्य घोष दल में शामिल महिलाएं और बच्चे भी उत्साह के साथ दिव्य घोष बजाते हुए आगे बढ़ते रहे।
पालकियों और बग्गियों में विराजमान रहे श्रीजी
शोभायात्रा में पांच चांदी की अलग-अलग पालकियों में श्रीजी विराजमान थे, जबकि 14 सुसज्जित बग्गियों में पंचकल्याणक के पात्र बने श्रद्धालु बैठे थे।
श्रद्धालुओं ने सफेद वस्त्र पहनकर यात्रा में भाग लिया। पूरे मार्ग को रंगोली से सजाया गया था और कई स्थानों पर जैन समाज के लोगों ने श्रीजी की आरती उतारी।
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पंचकल्याणक महोत्सव के लिए जैन महाविद्यालय परिसर में भव्य अयोध्या नगरी का निर्माण किया गया है। करीब 25 हजार वर्गफीट क्षेत्र में बनाए गए विशेष डोम पंडाल में लगभग 5 हजार श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की गई है।
श्रद्धालुओं के लिए तीन बड़ी भोजनशालाएं बनाई गई हैं, जहां शुद्ध सात्विक भोजन की व्यवस्था की गई है। बाहर से आने वाले मेहमानों के ठहरने की भी विशेष व्यवस्था की गई है।