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Satpura Tiger Reserve : 8 महीने कैद के बाद दो बाघों को मिली आजादी, चूरना जंगल में कॉलर आईडी से 24×7 निगरानी

Satpura Tiger Reserve

हाइलाइट्स

  • मालनी बाड़े से दो भाई बाघ किये रिहा।
  • चूरना जंगल में छोड़े गए।
  • कॉलर आईडी से मॉनिटरिंग।

Satpura Tiger Reserve : भोपाल। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (STR) के मालनी बाड़े में 8 महीने से कैद दो भाई बाघों को आजादी मिल गई। STR प्रबंधन ने दोनों को चूरना के घने जंगल में खुले में छोड़ दिया, ताकि वे अपना इलाका (टेरिटरी) बना सकें।

जंगल में छोड़ने से पहले दोनों बाघों को कॉलर आईडी लगाई गई, जिससे उनकी मूवमेंट की मॉनिटरिंग की जाएगी। ये दोनों बाघ मार्च 2025 में रायसेन के भोजपुर के पास अपनी मां से बिछड़ गए थे। तब उनकी उम्र 14-15 महीने थी। अब 2 साल के हो चुके हैं।

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मां से बिछड़े, इसलिए बाड़े में ट्रेनिंग

फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि बिछड़ने के कारण बाघ जंगल में सर्वाइव करने की बारीकियां नहीं सीख पाए थे। भूख मिटाने के लिए वे पालतू मवेशियों का शिकार कर रहे थे, जिससे ग्रामीण परेशान थे। इसलिए रेस्क्यू कर मालनी बाड़े में रखा गया। पिछले 8 महीनों में उन्हें शिकार की ट्रेनिंग दी गई। अब वे जंगल में खुद शिकार कर सकेंगे।

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पिंजरा खुलते ही दहाड़ते भागे

बाघों को छोड़ते समय फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा, डिप्टी डायरेक्टर ऋषभा नेताम, सहायक संचालक विनोद वर्मा, रेंजर आरपी पाठक और वन्यप्राणी डॉक्टर गुरुदत्त शर्मा मौजूद रहे।

टीम उन्हें पिंजरे में लेकर चूरना जंगल पहुंची। पिंजरा खोलते ही दोनों कुछ देर खड़े रहे, फिर दहाड़ते हुए जंगल की ओर भाग गए। कॉलर आईडी से उनकी लोकेशन ट्रैक होगी।

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रेस्क्यू की वजह

मार्च 2025 में भोजपुर रेंज में मां से बिछड़ने के बाद बाघ मवेशी शिकार कर रहे थे। ग्रामीण डरे हुए थे और फसल नहीं काट पा रहे थे। वन विभाग ने रेस्क्यू कर सतपुड़ा शिफ्ट किया।

ट्रेनिंग पूरी होने पर रिहा किया गया। यह रिहाई वन्यजीव संरक्षण की सफलता है। युवा बाघ अब जंगल में अपनी टेरिटरी बनाएंगे। विभाग की मॉनिटरिंग से मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होगा।

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