हाइलाइट्स
- नए साल में मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल में हो सकता है बड़ा फेरबदल।
- मंत्रियों के प्रदर्शन रिपोर्ट कार्ड के आधार पर कुछ मंत्री होंगे बाहर।
- क्षेत्रीय संतुलन के साथ निगम-मंडलों में भी नियुक्तियों की संभावना।
MP Cabinet Expansion : भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में नए साल की शुरुआत के साथ मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जल्द ही अपनी कैबिनेट का विस्तार और फेरबदल कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार यह विस्तार 20 जनवरी के बाद हो सकता है। सरकार और संगठन स्तर पर इसको लेकर मंथन शुरू हो चुका है।
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मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार
मुख्यमंत्री ने हाल ही में सभी मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की है। भोपाल और खजुराहो में हुई बैठकों में हर विभाग के दो साल के प्रदर्शन पर विस्तार से चर्चा हुई।
इन बैठकों के आधार पर मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया गया है। यह रिपोर्ट कार्ड कैबिनेट विस्तार और फेरबदल का मुख्य आधार बनेगा। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी मंत्रियों के कामकाज को लेकर सर्वे कराए हैं।
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3 – 4 मंत्रियों को दिखा सकते हैं बाहर का रास्ता
सूत्र बताते हैं कि कुछ मंत्रियों की कार्यशैली से केंद्रीय नेतृत्व संतुष्ट नहीं है। ऐसे में तीन से चार मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। वहीं सात से आठ नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना है। इनमें कई सीनियर विधायक शामिल हो सकते हैं, जो लंबे समय से मंत्री बनने का इंतजार कर रहे हैं।
विस्तार में होगा क्षेत्रीय और जातीय संतुलन
फिलहाल मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल में 31 मंत्री हैं। विधायकों की संख्या के हिसाब से अभी चार और मंत्रियों को बनाया जा सकता है। विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाएगा। कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते हैं।
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इसके अलावा निगम-मंडलों में नियुक्तियों का रास्ता भी साफ हो गया है। जिन नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलेगी, उन्हें निगम-मंडलों में समायोजित किया जा सकता है। इससे असंतोष को कम करने की कोशिश होगी।
युवा और अनुभवी नेताओं का होगा मिश्रण
मोहन यादव सरकार अपने दो साल पूरे कर चुकी है और अब संगठन को नई ताकत देने की तैयारी है। कैबिनेट विस्तार से पार्टी के विभिन्न गुटों और क्षेत्रों को संतुलन देने का प्रयास होगा। केंद्रीय नेतृत्व की नजर में यह विस्तार महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2028 के चुनाव नजदीक आ रहे हैं।
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राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह फेरबदल सरकार की छवि को और मजबूत करेगा। नए चेहरों से युवा और अनुभवी नेताओं का मिश्रण होगा। जनता भी बदलाव की उम्मीद कर रही है। देखना यह होगा कि अंतिम सूची में कौन-कौन शामिल होता है। फिलहाल मंथन जारी है और जल्द फैसला आने की संभावना है।