Sehore News : सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में इन दिनों भ्रष्टाचार और सरकारी कार्यों में लापरवाही का बोलबाला है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह गृह जिला, जो कभी विकास का प्रतीक माना जाता था, अब भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा हुआ नजर आ रहा है।
जानकारी के मुताबिक, जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारी गंभीर शिकायतों को नजरअंदाज कर रहे हैं, जिससे अपराधी बेखौफ होकर मनमानी कर रहे हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन और सीएम हेल्पलाइन के निपटारे में भी लगातार गिरावट आ रही है। सांसद आलोक शर्मा ने 12 दिन पहले इस पर संज्ञान लिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा।
पंजीयक कार्यालय में ड्राइवर का जलवा
सीहोर के जिला पंजीयक कार्यालय में हालात इतने बिगड़े हुए हैं कि एक ड्राइवर ही असली बॉस बन बैठा है। जिला पंजीयक प्रेमनंदन सिंह के ड्राइवर रवि सोलंकी न केवल कार्यालय में बैठकर अधिकारी की आईडी से फाइलें क्लियर कर रहा है, बल्कि कई वेंडरों पर पैसे वसूलने का दबाव भी डाल रहा है। सांसद आलोक शर्मा और विधायक सुदेश राय ने भी मौके पर पहुंचकर निर्देश दिए थे, लेकिन रवि सोलंकी को न हटाया गया और न ही कोई जांच शुरू हुई।
यह अनियमितता न केवल पंजीयन प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है, बल्कि जिले के राजस्व को भी नुकसान पहुंचा रही है। कलेक्टर कार्यालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है। अगर ऐसी शिकायतों पर तुरंत एक्शन होता, तो शायद यह सिलसिला रुक जाता।
कृषि विभाग में वसूली का खेल
कृषि विभाग में भ्रष्टाचार का एक और काला चेहरा सामने आया है। जिला कृषि आदान विक्रेता संघ ने उप संचालक अशोक उपाध्याय पर सीधी वसूली का आरोप लगाया है। संघ का दावा है कि छापेमारी के नाम पर उपाध्याय नीति के विरुद्ध कार्रवाई करते हैं और 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की रिश्वत मांगते हैं। इसकी शिकायत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, कलेक्टर और संभागीय कमिश्नर तक पहुंचाई गई, लेकिन 15 दिनों बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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कृषि व्यापारियों का गुस्सा भड़क रहा है। संघ के अध्यक्ष ने कहा, “हम किसानों को सस्ते बीज उपलब्ध कराने की कोशिश करते हैं, लेकिन अधिकारी हमें ही लूट रहे हैं।” यह मामला जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, जहां किसान पहले से ही कर्ज के जाल में फंसे हैं।
अगर केंद्रीय मंत्री तक शिकायत पहुंचने के बावजूद चुप्पी साधी जा रही है, तो स्थानीय स्तर पर न्याय की उम्मीद कैसे की जाए? विभागीय जांच की मांग तेज हो रही है, लेकिन प्रशासन की उदासीनता निराशाजनक है।
पीएम पोषण योजना में लापरवाही
पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजन) में अनियमितताओं का मामला भी सुर्खियों में है। ग्राम पंचायत अहमतनगर के सरपंच ने शामला शाला हीरापुर में भोजन की खराब गुणवत्ता और वितरण में गड़बड़ी की शिकायत की थी। जांच दल ने कई खामियां पाईं—जैसे पुराना चावल, कम मात्रा और रजिस्टर में हेराफेरी—लेकिन जिम्मेदारों पर अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। बच्चे भूखे रह जाते हैं, जबकि योजना का पैसा गायब हो रहा है।
सरपंच का कहना है, “जांच रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी, लेकिन कोई फॉलो-अप नहीं। बच्चे स्कूल आते हैं, लेकिन भोजन नहीं मिलता।” यह योजना बच्चों के पोषण के लिए है, लेकिन लापरवाही से स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। जिले में कई स्कूलों में ऐसी शिकायतें हैं, लेकिन प्रशासन सो रहा है। अगर समय पर कार्रवाई होती, तो हजारों बच्चे लाभान्वित होते।
सांसद आलोक शर्मा का बयान बेअसर
भोपाल-सीहोर सांसद आलोक शर्मा ने जिले की स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामलों पर जिला प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। कलेक्टर को सख्त कार्रवाई करनी होगी। ये गंभीर मुद्दे हैं।”
सांसद ने 12 दिन पहले इन मामलों पर निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं। उनका बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव नजर नहीं आ रहा। स्थानीय लोग कहते हैं, “सांसद साहब की आवाज सुनी जाती, तो शायद कुछ होता।”
कलेक्टर का नंबर ‘नॉट रिचेबल’
भ्रष्टाचार के बीच अधिकारियों से संपर्क करना भी नामुमकिन हो गया है। कलेक्टर बालागुरु का सरकारी सीयूजी नंबर 7587977500 हमेशा ‘नॉट रिचेबल’ बताता है। कमिश्नर और अन्य अधिकारियों के नंबर भी अपडेट नहीं हैं।